मिले हैं आज बरसो के बाद ऑकवर्डसी हँसी दिए कोई चला जाता हैं तो कोई बाहें फैलाये गले लग जाता हैं कितनी सारी यादें इन दोस्तो के साथ कुछ साथ रह गए तो कुछ छूट गए सबके अतरंगी किस्सो में एक बात समझ आती हैं कॉलेज के कैंपस में बैठे सभी ने प्लान्स बनाये कुछ कैटरिंग बिज़नेस कुछ ऑनलाइन सेलिंग तो कुछ और फिर आखिर सपने पूरे क्यों नही हुए? उस कैंपस में किये हुए वादे क्यों वही छूट गए? क्यों सबने अपना अलग रास्ता पकड़ लिया? शायद इसे बड़ा या मैच्योर्ड होना कहते हैं बचपने में किये हुए वादों के लिए कमिटमेंट, पैसा और समय चाहिए फिर अपना करियर कब बनाते? नौकरी, गाड़ी, घर, शादी, बच्चे ये सब समय मे होजाये तो बेहतर हैं सोचा हुआ बिज़नेस अगर ना चलता तो? हम सबसे पीछे रह जाते आखिर जो होता हैं अच्छे के लिए होता हैं इन्हीं सब बातों से अपने आप को कन्विंस कर हम दूसरे किस्सो में खो जातें हैं पर आँखों मे वही सवाल लिए एक दूसरे की ओर देखते हैं रिस्क तो सबमे होता हैं क्या हमने गलती कर दी? शायद वो सपना आज हमारी खूबसूरत हकीकत होता -Shamitha Heramb