स्कूल के खेल कुद में
कही किसी के पेन के झटकने से
मेरी कमीज सियाही मे डूब गई|
घबराए मैने कमीज की ओर देखा
फिर मुस्कुराकर मैने दोस्तों से कहाँ
दाग अच्छे होते हैं।
टीवी पे दिखाए उस विज्ञापन पर
मेरा पूरा भरोसा था|
माँ को उसपर मुस्कुराते हुए भी देखा था|
बेखौफ मैं अपने खेल में लग पडा
क्योकि, दाग अच्छे होते हैं|
घर लौटते वक्त एक दोस्तने
मेरे बाजूपर हाथ रखकर
दया भरी आखों से मुझे देखा |
मैने हाथ झटक कर कहाँ
दाग अच्छे होते हैं|
माँ आंगन में कुछ खोज रही थी
मैं पीछे से झपटकर जोर से चिल्लाया
दाग अच्छे होते हैं ना माँ।
माँ ने पलटकर गुस्से से देखा
दाग को देख फिर उड़ता हुआ उनका हाथ
मेरे गाल पर पड़ा।
मुरगा बने अपने गालो की लाली छुपाए
मैं पापा की ओर देख रहा था|
मन ही मन इस सवाल को
टटोल रहा था।
दाग तो अच्छे होते हैं ना?
-Shamitha Heramb
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